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मायावती के इस्तीफे का सच !

Mayawati resigns truth

नई दिल्लीः बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को अचानक से राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। मायावती का पारंपरिक वोटबैंक माने जाने वाले दलितों को लेकर बीजेपी की रणनीति भी उनके इस्तीफे के पीछे की वजह मानी जा रही है। 

बीजेपी दलित वोट बैंक को अपने पाले में करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। बीजेपी नेताओं का दलितों के घर खाना से लेकर रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना इसी दिशा में उठाया गया सियासी कदम है। वहींमायावती यूपी के 19 प्रतिशत दलितों को अपने पाले में करने में असफल दिख रही हैं। 

मायावती का राज्यसभा का कार्यकाल 2 अप्रैल 2018 को खत्म होना था और इसमें सिर्फ 8 महीने बचे थे। माया को सिर्फ बीएसपी की ताकत पर राज्यसभा में एक और कार्यकाल नहीं मिल सकताक्योंकि उनके पास सिर्फ 18 विधायक हैंजबकि यूपी में राज्यसभा की एक सीट के लिए कम से कम 38 विधायकों की जरूरत होगी। 
उन्होंने इस कदम से आक्रामक राजनीति का संकेत दिया है। मायावती ने दलितों पर हो रहे अत्याचार को मुद्दा बनाकर राज्यसभा की सदस्यता छोड़ी है। उनके कैलकुलेशन के हिसाब से टीवी पर लाइव इस्तीफे के ऐलान से अधिक असर पड़ेगा। इसलिए उन्होंने चुपचाप ऊपरी सदन से कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करने के बजाय हंगामेदार ढंग से सदस्यता छोड़ने का फैसला किया। 


नाटकीय अंदाज में इस्तीफा देकर वह 2019 लोकसभा चुनाव के लिए नए सिरे से शुरुआत कर रही हैं। हालांकि,राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर वह इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहती हैं तो उन्हें ग्राउंड लेवल पर तुरंत काम शुरू करना होगा। उन्हें यह समझना होगा कि विपक्षी दलों के लिए सांकेतिक चीजों की राजनीतिक फसल काटने का रास्ता नहीं खुला है। (इनपुटः एजेंसी भी)

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